और मेरा खून खौल उठता है...

Kuchh kahi kuchh unkahi की कभी सोचा है -की, कैसा लगता होगा -मलमल के कपड़ों में सज, कड़ी की विशेषताओं पे बोलना।या, विदेशी 'बो" बंधे कंठ से स्वदेशी अंग वस्त्रं पहनने की सलाह।या, फ्रेंच अतर में नहा कर देशी दुर्गंधी पर एक अभिभाषण।या, मुर्गे की एक पूरी साबुत टांग अपनी दांत से नोचते... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[25 Jan 2010 12:49 PM]

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