सब सपनों को साकार करे (गणतंत्र दिवस)

काव्य तरंग नई भौर में,नए छोर से,साध कर नए लक्ष्य कई नवल यतन कर,नवयौवन संग,पलको में,नव स्वप्न लिए सभी विधा में, सभी क्षेत्र मेंटाके नई उप्लाभियाँ छोड़े छोटी सोच पुरानीसभ्यता को सम्रध करे शिक्षा का हो, अधिकार सभी को नवप्रतिभा को, मिले पहचान राजनीति रहे गंगा सी घर घर... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

रानीविशाल द्वारा रचित

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[25 Jan 2010 11:37 AM]

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