कुछ बातें लहरों की
ह्रदय समुद्र कीभाव लहरेंलौट आती हैंबार-बारक्या किनारे का पत्थर हो तुम?चलती आयी हूँ बहुत दूर सेपड़ गए छले हायपाँव मेंक्या बिन मंजिल की डगर हो तुम?देती रही सदाएं gunjee समग्र दिशाएँसिहर उठी फिजाएं दिया क्यों नहीं प्रत्युत्तरअस्तित्व में अगर हो तुम?२आखिर कर...
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chetna
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[29 Dec 2009 11:10 AM]



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