बनोगे मेरी अभिव्यक्ति

पुनश्च हां, तुम याद आओगेआंखों से बरस जाओगे।जब तपस सी होगी उलझनझुलसने लगेगा फसल मनहर्षाने को कण-कणबदरी बन कर छा जाओगेहां, तुम याद आओगे।लगने लगेगी लंबी रातअंधकार देगा सतत आघातलाने का स्वर्णिम प्रभातसूरज-सा तप जाओगेहां, तुम याद आओगे।जब जन्म लेगी संवेदना... [पूरी पोस्ट]
writer chetna
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[24 Jan 2010 08:35 AM]

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