बनोगे मेरी अभिव्यक्ति
हां, तुम याद आओगेआंखों से बरस जाओगे।जब तपस सी होगी उलझनझुलसने लगेगा फसल मनहर्षाने को कण-कणबदरी बन कर छा जाओगेहां, तुम याद आओगे।लगने लगेगी लंबी रातअंधकार देगा सतत आघातलाने का स्वर्णिम प्रभातसूरज-सा तप जाओगेहां, तुम याद आओगे।जब जन्म लेगी संवेदना...
[पूरी पोस्ट]
chetna
8
0
0
0
0
[24 Jan 2010 08:35 AM]



Shuffle








