पुनश्च

पुनश्च आज अरसे बाद फिरपिघला कुछ मन मेंलाओ, कलम दोकविता उमड़ती है।भावों के बादलों सेआकुल-व्याकुल मन हैकोई स्नेहिल आंचल दोआंखें बरसती हैं।मन ही नहीं चाहता पढऩामन की मौन भाषाकौन सुनेगा इसकीआंखें कुछ कहती हैं।... [पूरी पोस्ट]
writer chetna
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[24 Jan 2010 08:40 AM]

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