धन्य-धन्य कंसल्टिंग वाले ब्लॉगविधाता
प्रस्तुत है जयराम 'आरोही' की कविता जो उन्होंने कल ही ब्लागिंग जैसे नए विषय पर लिखी है. आप कविता बांचिये.लिखने का न लूर था, ब्लागिंग होइ गई बंद कहाँ से लाता आईडिया, लगवाता पैबंद लगवाता पैबंद थाम के रखता इसकोसमझ में आया यही यहाँ से जल्दी खिसको मगर आईडिया...
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बालकिशन
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[25 Jan 2010 09:29 AM]



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