शोभा भी न कम हो
"शोभा भी न कम हो "रस्ते चली मैं जिस पर, छोडूँ उसे मैं कैसे ?गैरों से न मैं परेशां, खुद पर सितम न हो कम ।।धिक्कार है मनुज को, अधिकार न दिया जो ,संघर्ष में ही जीवन, संताप भी न हो कम ।।जीवन के इस सफ़र में, मिलते तो सेज दोनों ,फूलों की सेज पाकर, काँटों की...
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Kusum Thakur
कविता
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[25 Jan 2010 09:00 AM]



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