फूल पर तितलियां
दर्द दिल में मगर लब पे मुस्कान हैआशिकों की यही आन है बान हैलाख कोशिश करो आके जाती नहींयाद इक बिन बुलाई सी महमान हैखिलखिलाता है जो आज के दौर मेंइक अजूबे से क्या कम वो इंसान हैज़र ज़मीं सल्तनत से ही होता नहींजो दे भूखे को रोटी, वो सुलतान हैमीर, तुलसी,...
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नीरज गोस्वामी
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[24 Jan 2010 23:35 PM]



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