हिंदी समाज की उपलब्धि बनीं प्रियंका और कंगना ???
माफ करें। फेसबुक पर कल यह राय रखी थी। दोस्तों ने इस पर टिप्पणियां दीं और अपनी साच जाहिर की। मुझे लगता है कि प्रियंका खेपड़ा और कंगना रानाऊत को मिले राष्ट्रीय पुरस्कार को हिंदी समाज की उपलब्धि के तौर पर देखा जाना चाहिए। लिखने और बताने की जरूरत नहीं कि...
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brahmatmaj
सोशल इश्यूमस्ती मालगाड़ीकंगना रानाऊतप्रियंका चोपड़ा
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[24 Jan 2010 22:49 PM]



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