Veer Bahuti
जीना सीख लिया है। [कविता]चल रही है दोनोमखमली सी चाहतें औरऔर खार सी जिन्दगीसमानान्तर रेखाओं की तरहदूरी बना करउठता हैदोनो के बीचएक समुद्रकुछ अनुभूतियाँ और कुछ संवेदनाये लियेकभी कभी बह जाता हैकागज़ की पगडंडियों पर शब्दों की दो किरणेंउधार ले करशायद दोनो...
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निर्मला कपिला
कविता
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[24 Jan 2010 22:00 PM]



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