ऐ अमरों की जननी, तुमको शत-शत बार प्रणाम, मातृ-भू शत-शत बार प्रणाम।
जीवन की अंधियारीरात हो उजारी!धरती पर धरो चरणतिमिर-तम हारीपरम व्योमचारी!चरण धरो, दीपंकर,जाए कट तिमिर-पाश!दिशि-दिशि में चरण धूलिछाए बन कर-प्रकाश!आओ, नक्षत्र-पुरुष,गगन-वन-विहारीपरम व्योमचारी!आओ तुम, दीपों को निरावरण करे निशा!चरणों में स्वर्ण-हासबिखरा दे...
[पूरी पोस्ट]
लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्`
34
3
0
3
19
[24 Jan 2010 21:16 PM]



Shuffle








