कुमार विनोद : ग़ज़ल-गाँव का नया दुष्यंत
हिंदी-साहित्य की समस्त विधाओं में चाहे वो कहानी हो, कविता हो, गीत-नवगीत हो, उपन्यास हो, लेख, यात्रा-संस्मरण या आलोचना आदि हो...इन समस्त विधाओं में ग़ज़ल हमेशा से हाशिये पर ही खड़ी नजर आती है। आप कोई भी साहित्यिक पत्रिका उठा कर देख लीजिये...हफ़्ते, पखवारे,...
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गौतम राजरिशी
एक शायर की डायरी से...
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[24 Jan 2010 20:30 PM]



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