ये वादा भी तोड देते हैं!
वादा भी अजीब चीज है। करते वक्त लगता है सचमुच जीने का मकसद मिल गया। अब इसे निबाहना ही आदमी होने की शर्त है। लेकिन फिर तोड देते हैं। तोडते वक्त सब कुछ पहले की तरह हो जाने का अहसास चेहरे पर नुमायां हो जाता है। दिल इस डर में घुलने लगता है कि कमीनगी थोडी और...
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सचिन ..........
दोस्ती
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[24 Jan 2010 08:43 AM]



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