बाबू जी सेवानिवृत्त हो गये हैं.

पिताजी हाथों में सब्जी का थैला, अंतर्मन में सवालों का झमेला, उलझते, रीझते,खीझते, और कभी मुस्‍काते , गोलमटोल आँखों में, एक उम्मीद लिए, कभी इस कभी उस दुकान जाते, इधर-उधर,भागते,मोल भाव करते, बहू -बेटे की कमाई के चार पैसे, बचाने की जद्दोजहद में कितनी तल्लीनता से... [पूरी पोस्ट]
writer विनोद कुमार पांडेय
views
33
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
8
[24 Jan 2010 11:47 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix