आवारगी

फुरसत के रातदिन आख़िर उमर सारी युंही करता रहा आवारगीफ़ितरत में मेरी आफ़तों से रब्त या आवारगीतेरी बसर के रहगुज़र दिल की सदा हमने सुनीता-उम्र इक लंबा सफ़र जीता रहा आवारगीकुछ कैफियत की रात थी फिक्रे सुखन भी साथ थीहमने कही इक बात ये बस बाखुदा आवारगीबेमंज़िलो आराम शब ना आशना... [पूरी पोस्ट]
writer अभिषेक'शफक़'
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[24 Jan 2010 02:07 AM]

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