हाँ वो सपूत वीर सुभाषचंद्र बोस ही था,
गड़..ड़..ड़..ड़...ड़..ड़..ड़.. गर्जना घनघोर थी|तड़..ड़..ड़..ड़..ड़..ड़..ड़.. ताड़ना चहुँ और थी||आर पार तार तार शर्मसार चुनड़ी की कौर थी |तानाशाही, क्रूरपन, मलेछों की सिरमोर थी|| भारत माँ के आँचल में जब अनगिनत छेद थे |अंग्रेजों के प्रगाढ़ किल्ले जब पूरी...
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खुला सांड
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[24 Jan 2010 00:30 AM]



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