मेला.. जाने कहां गये वो मेले
बचपन में मुंशी प्रेमचंद की एक कहानी पड़ी थी ईदगाह... उसमें हामिद नाम का एक छोटा सा बच्चा था, जो अपनी दादी के लिए मेले से एक चिमटा लाया था, ताकि उसकी दादी के हाथ जलने न पाएं... उस कहानी को पढ़कर दो आंसू हामिद और उसकी दादी के लिए ज़रूर छलक आते थे... लेकिन...
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अबयज़ ख़ान
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[24 Jan 2010 00:26 AM]



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