अंत का प्रारंभ !
दिन बड़े मासूमियत से गुजरा करते थे । अपने होने का भरपूर एहसास कराकर ही शाम को ढलते थे और फिर चाँद को सौंप कर चल देते थे । दिल और दबी जुबाँ जिस बात को दिन में खुद से न कह पाते वो बड़ी फुर्सत से चाँद से कहा करते ।उन कस्बाई दिलों की मोहब्बत किताबें बदलते...
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अनिल कान्त :
Love Story
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[24 Jan 2010 00:07 AM]



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