छिपा हुआ जो एक गुण , सिर्फ उसी को देख
छिपा हुआ जो एक गुण , सिर्फ उसी को देख झूठे धोखेबाज़ को, लानत औ धिक्कारलेनदार होवें खड़े,आकर जिसके द्वारकसमें खा , फिर जाए जो, कितना है वो नीचकरिए चौराहे उसे, नंगा सबके बीचजो दाता के नाम पर, धोखा देता जाएनिश्चय ही खा जायेगी ,उसको सबकी हायसबका पैसा...
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योगेश स्वप्न
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[23 Jan 2010 22:42 PM]



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