अज़ीब शख़्स था, आँखों में ख़्वाब छोड़ गया

भीगी गज़ल अज़ीब शख़्स था, आँखों में ख़्वाब छोड़ गयावो मेरी मेज़ पे, अपनी किताब छोड़ गया नज़र मिली तो अचानक झुका के वो नज़रेंमेरे सवाल के कितने जवाब छोड़ गयापलट के आने का वादा किया था, देने सकूँ मगर वो दिल में, मुसलसल अज़ाब छोड़ गयाउसे पता था, कि तन्हा न रह सकूँगी मैं वो... [पूरी पोस्ट]
writer श्रद्धा जैन

Shrddha Jain

views
81
upvote
8
downvote
0
rating
8
comments
25
[23 Jan 2010 23:03 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix