ये रातें ये मौसम ये हंसना हंसाना: पंकज मलिक की सोंधी आवाज़
बरसों पहले की बात है । लता मंगेशकर का अलबम श्रद्धांजली जारी हुआ था । शायद 1992 में । वो कैसेटों का दौर था । हमने फ़ौरन ही अपना जेब-ख़र्च इस कैसेट के हवाले कर दिया था । और उसके बाद बरसों-बरस तक लता जी की आवाज़ में ये नग़्मे गूंजते रहे थे हमारे स्टीरियो...
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yunus
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[23 Jan 2010 22:18 PM]



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