गंदी हो रही है बच्चों की भाषा!

Tisari-Ankh पाश्चात्य दार्शनिकों का मानना है कि बच्चे जिस समय दुनिया में जन्म लेते हैं उस समय उनका मस्तिष्क एककोरी स्लेट के समान होता है जिसमें कोई संदेश नहीं लिखा हुआ होता। बच्चा धरती पर आने के बाद संदेशों कोपढ़ना सीखता है, उन्हें अपने मस्तिष्क में स्टोर करता है,... [पूरी पोस्ट]
writer Mohanlal Gupta

samaj

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[23 Jan 2010 08:03 AM]

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