“संस्मरण” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

शब्दों का दंगल दादी चम्मच का प्रयोग किया करो!   आज से 45-50 साल पुरानी बात है। उन दिनों एक कबीले की संयुक्त हबेली हुआ करती थी। किसी घर में अच्छी साग-सब्जी बनती थी तो माँग कर खाने में बहुत आनन्द आता था। उन दिनों मैं नजीबाबाद के मुहल्ला-रम्पुरा में रहता था। इसी... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

संस्मरण

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[23 Jan 2010 08:00 AM]

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