वसंतोत्सव

यही है वह जगह काशी विश्वविद्यालय यही है वह जगह जहां नामालूम तरीके से नहीं आता है वसंतोत्सव हमउमर की तरह आता है आंखों में आंखे मिलाते हुए मगर चला जाता है चुपचाप जैसे बाज़ार से गुज़र जाता है बेरोजगार एक दुकानदार की तरह मुस्कराता रह जाता है फूलों लदा सिंहद्वार इस बार वसंत... [पूरी पोस्ट]
writer अफ़लातून

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[23 Jan 2010 04:39 AM]

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