हाइकु-४

अनुभूति कलश १- मिट्टी का तेल दियासलाई की लौ बहू की बलि । २- सपने बुने अलगनी में पड़े सूखते रहे। ३- दिन या रात चन्द्रमा परेशान ब्रह्म मुहुर्त्त? ४- दर्पण का सच टूट-बिखर कर रहा अमिट । ५- चाँद हैरान सूरज परेशान चाँदनी रोई । ६- जीवनदाता बन गया राक्षस सुरक्षा कहाँ ? ७-... [पूरी पोस्ट]
writer ramadwivedi

हाइकुhaiku

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[23 Jan 2010 00:27 AM]

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