चाणक्य दर्शन-धर्मग्रंथों की आलोचना वाले कष्ट उठाते हैं (Dhrama granthon ki ninda galat-hindu dharma sandesh)
दारिद्रयनाशनं दानं शीलं दुर्गतिनाशनम्।अज्ञाननाशिनी प्रज्ञा भावना भयनाशिनी।।हिंदी में भावार्थ-दान से दरिद्रता, शील भाव से दुर्भाग्य तथा निष्ठा से भय का नाश होता है।अन्यथा वेदपाण्डितयं शास्त्रमाचारमन्यतथा।अन्यथा कुवचः शान्तं लोकाः क्लिश्चन्ति...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
hindi-sahitya
12
0
0
0
0
[23 Jan 2010 00:13 AM]



Shuffle







