इंसानो जैसे दुसरों पर नहीं हंसते बंदर!!

शिल्पकार के मुख से अखबारी कविता-रद्दी पेप्योर से उठाए गए शीर्षक-आशीर्वाद चाहुंगाआक्रामक तेवरनही चलाने देगें टैक्सीसरकार का कोईलेना देना नहीसबसे बड़ी गिरावटइस साल कीएक औरटैक्सी चालक पर हमलाधुमिल होती छविएक्सरसाईज सेपाएं चेहरे मे रौनकये काले दागहटेंगे कैसे?इंसानो जैसे दुसरों... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा

कविता

views
21
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
12
[22 Jan 2010 20:30 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix