किसकी शामत आई है

स्पंदन     ( SPANDAN) नजरें. कुछ और कह रहीलब की अलग कहानी हैदेते आगे से मिश्री औरपीछे हाथ में आरी हैकोई बड़ा हुआ है कैसेऔर कोई कैसे चढ़ा हुआ हैखींचो पैर गिराओ भू परये किस की शामत आई है..रख कर पैर किसी के सरबस अपनी मंजिल पानी है.है हाथ दोस्ती का बढा हुआ.दिल से दुश्मनी निभानी... [पूरी पोस्ट]
writer shikha varshney
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[22 Jan 2010 13:10 PM]

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