गजल

JHAROKHA मत दिखाओ मुझे वो आईना जिससे हो गई नफ़रत मुझे जिसमे अपना ही अक्स अब बदला नजर आता है। सोचती हूं खोती जा रही हूं अपनी ही पहचान मगर नहीं ,यहां तो हर शख्स ही गंदला नजर आता है। बेखुदी में जाने क्या कह गये हम उसे हैरान सा खड़ा उसे मुझमें पगला नज़र आता है। किससे... [पूरी पोस्ट]
writer JHAROKHA

कविता

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[22 Jan 2010 13:02 PM]

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