आज मिला मैं "मुन्शी" से, देखा उसका घरबार, आप भी मिलिये और इसी बहाने देखिये महंगाई को एक नये नजरिये से . . . . . . . . .प्रवीण शाह।

सुनिये मेरी भी.... ...मेरे महंगाई से चिंतित मित्रों,सबसे पहले तो एक चेतावनी, यदि आप सौन्दर्य आग्रही हैं तो न ही देखें इस पोस्ट को, आपका सौन्दर्य बोध आहत हो सकता है... और खाते समय तो कतई नहीं...हो सकता है कि आप की भूख ही खत्म हो जाये...या खाने का स्वाद जाता रहे...बता ही... [पूरी पोस्ट]
writer प्रवीण शाह

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[22 Jan 2010 12:38 PM]

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