झगड़ा भी एक शय की तरह बिकता-हिन्दी व्यंग्य कविता

 दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका झगड़ा भी एक शय है जो बड़ा पाव की तरह बाजार में बिकती। अमन के आदी लोगों में चैन कहां कहीं शोर देखने की चाहत उनमें दिखती। इसलिये लिख वह चीज जो बाजार में बड़े दाम पर बिकती। अठखेलियां करती कवितायें मन भाती कहानियां और अमन के गीत लिखना है तो अपने दिल के सुकूल के... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[22 Jan 2010 11:50 AM]

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