मैंने जो किया वह सही है पर फिर भी अकेला हूँ क्यों ?-- (मिथिलेश दुबे)
कुछ भी सही लगता रहा न जाने क्यों गलत होते हुए भी ? हमेशा से एक तलाश अधूरी लिए दिल के कोने में कभी नहीं भटका अचानक ही कुछ ऐसा जिसकी मुझे जरूरत थी पर शायद उम्मीद तो कभी भी न थी । पहली मुलाकात की याद शायद ही कभी जेहन से उतर पाये । इन सब के बीच खुद इतना खुश...
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Mithilesh dubey
दुबे लेख लंगोटनन्द
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[22 Jan 2010 09:06 AM]



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