कुहेलिका . कुहेलिका
पूरे उत्तरी भारत में ठंढ का ऐसा आलम है की अखबार और टी वी चैनल वालों को उपयुक्त विशेषण नहीं मिल रहे हैं .अनुप्रास अलंकार की तो बात hin नहीं है .मित्र नीरज ने दिल्ली के कुहरे , ठंढक और उसमें बनते बिगड़ते मनोविज्ञान का बढ़िया खाका अपनी इस कविता में किया...
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Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर
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[22 Jan 2010 06:29 AM]



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