तालिबान
कोई दलील नहींकोई अपील नहींकोई गवाह नहींकोई वक़ील नहींवहाँ सिर्फ़ मौत हैकोई इंसान नहींकोई ईमान नहींकोई पहचान नहींकोई विहान नहींवहाँ सिर्फ़ मौत हैवहाँ सिर्फ़ मौत हैवहाँ सिर्फ़ धर्म हैधर्म को मानिएया फिरबेमौत मरिए...
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जयप्रकाश मानस
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[22 Jan 2010 05:02 AM]



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