अनूप सेठी
कुल्लू और मनाली के बीच नग्गर में निकोलिस रोरिक के खुले संग्रहालय में रखे लोकशिल्प 2रोहतांग से दुनिया में वापसीहवा कुछ बची है चोटियों परसांस भरो, हल्का कर देती हैपैदल चल कर आए थेपंख लगा कर टहलाती हैबची हुई फीकी गदगद हरियालीखुश्बू पत्तों कीअनछुई चांदी...
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anup
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[22 Jan 2010 02:26 AM]



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