मेरी बेटी

amitraghat आसढ़ का दिन था चारों और फैले बादलों के थानऔर बारिश की गिरती रिमझिम फुहार ओसारे में खड़ीउत्फुल्ल थी लली माँ गई थी बाजार खिन में लिया उसने ठानचुन्नी को फैंट बाँहों को चढ़ाया जैसे तैसे साना आटा टूटे कुछ नाखून हुई दुखी पर फ़िर से काम में वह जुटीपरात में जमाया... [पूरी पोस्ट]
writer Amitraghat
views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[26 Sep 2008 02:54 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix