मेरी बहन

amitraghat दरवाजे की आड़ खड़ी ,लिए हाथ मैं थाली, था जिसमे चावल काली मूंछ ; सुन रही थी बेटे को कहते बहन की चोटी को गाय की पूँछ , मंद मंद मुस्करा , कर रही थी झूठा गुस्सा "मारूंगी चपत तुझे , मत सता बहन को अपनी कुछ दिन का है जो हिस्सा " सुन माँ की बात लजाई युवती ; कर... [पूरी पोस्ट]
writer Amitraghat
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[16 Oct 2008 09:07 AM]

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