आत्मघाती का सच
उस औघड़ शाम में जाने किस खंभार में तार पर बैठी हल्ला करती लाल चिडिया और आसमान पर टंगे - नीचे गिरते रक्तिम बादल और अरे हाँ !था तो मैं भी वहीं बूढ़े बोहड़ के नीचे उस जन संकुल स्थल पर जब हुआ था स्फोट और उड़ गए थे - सत्ताधीशों लोलुपों के - कुछ नेताओं के -...
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Amitraghat
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[06 Feb 2009 00:26 AM]



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