सुंदरतम सजनी

amitraghat स्मृति-प्रिय सुंदरतम सजनी !आया जब से तुम से मिल कर ,ले - ले चुम्बन आलिंगन भर ,नहीं भूलता मैं वह रजनी -आच्छादित घन घोर घटा मैं,पानी बरस रहा था रिमझिम ,चकमक चमके विधुत-स्वर्णिम ,अग-जग था अचित निद्रा मैं ;आकर चुपके से पा अवसर ,तुमने कितने धीरे - धीरे , हाथ... [पूरी पोस्ट]
writer Amitraghat
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[09 Feb 2009 01:24 AM]

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