सेल्समेन
सेल्समेनघास के विराट मैदानों की तरहफैली सर्द रात के सन्नाटेको चीरती है- जैसे लकडहारे चीरतें हैं लकड़ी-उसकी माँ की चीखऔर हम सब बड़ जातें हैंपोस्ट - मार्टम कक्ष मैंमेरे सामने ही होता है शव विच्छेदनऔर निकलती है उसमें से-ढेरों मन गालियाँ-दुस्तर लक्ष्य-अंतहीन...
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Amitraghat
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[25 Aug 2009 08:20 AM]



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