तरुणाई के पार

amitraghat उसतरूणाई के अंतिम पहरजब मैने उसेठठाते-उछलते-कूदते-धप-धड़ामगिरते उठते देखा थामगरसरलता के अवसानकी उस घड़ीके साथ हीवह लड़का अब बड़ा-सा दिखता हैशबल पृष्ठों से भरी मेगज़िन को वहबेहिचक पीछे से पलटसस्मित देखता है !... [पूरी पोस्ट]
writer Amitraghat
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[07 Jan 2010 22:58 PM]

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