मुरली तेरा मुरलीधर - 42

अखिलं मधुरम् वह इच्छुक है सुनने को तेरे गीतों का स्वर मधुकरआ आ मुख निहार जाता है नीर नयन में भर निर्झरसरस तरंगित उर कर अपना बाँट रहा आनन्द विभवटेर रहा सुख गीत गुंजिता मुरली तेरा मुरलीधर ॥२२६॥सुन वह कैसे गाता तूँ विस्मय विमुग्ध सुन-सुन मधुकरइस नभ से उस नभ तक करता... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu

murali tera muralidhar

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[21 Jan 2010 21:27 PM]

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