मेरे घर की खुली खिड़की से .....

Gyanvani मेरे घर की खुली खिड़की सेअलसुबहजगाता है मुझेचिड़ियों का कलरव गान.....ठिठोली कर जाती हैरवि की प्रथम किरणअंगडाई लेते कई बार.....पूरनमासी का चाँद भीझेंपता हुआ साझांक लेता है बार -बार....झर-झर झरते पीले फूलदेते हैं दस्तकखिडकियों पर कई बार.....मीठी तान छेड़... [पूरी पोस्ट]
writer वाणी गीत

खिड़की

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[21 Jan 2010 20:52 PM]

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