नमन
जिसने मुझेउँगली पकड़करचलना नहीं सिखायाकहा कि खुद चलोगिरो तो खुद उठो,जिसने राह नहीं दिखाई मुझेकहा कि चलती रहोराह बनती जायेगी,जिसने नहीं डाँटा कभीमेरी ग़लती परलेकिन किया मजबूरसोचने के लियेकि मैंने ग़लत किया,जिसने कभी नहीं फेरामेरे सिर पर हाथदुलार सेपर...
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mukti
पिता
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[21 Jan 2010 14:16 PM]



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