एक दुनिया ऐसी भी

balliabole उमेश चतुर्वेदीकिसी सभा संगत में बोलने का मौका मिले तो अच्छे-भले लोगों की बांछें खिल उठती हैं, ऐसे में किसी नए-नवेले को अवसर मिले तो उसकी खुशियों का पारावार नहीं होगा। दिल्ली की एक संगत से बुलावा मिला तो मेरी भी हालत कुछ वैसी ही थी। लेकिन वहां पहुंचकर जो... [पूरी पोस्ट]
writer उमेश चतुर्वेदी
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[21 Jan 2010 10:45 AM]

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