तलाश नए चेहरों की
पुराने चेहरों पर झुर्रियां पड़ चुकी थीं । तरह-तरह की झुर्रियां असफलता की ,बदनामी की,कुंठा की झुर्रियां । कब तक काम चलाएं पुराने चेहरों से भला । जनता भी ऊब चुकी थी उनसे । वही खीसें निपोरने का पुराना ढंग , वही घिसे-पिटे डॉयलाग,वही हाथ जोड़ने की मध्ययुगीन...
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Atul CHATURVEDI
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[21 Jan 2010 10:04 AM]



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