तुम्हें क्या मालूम ये शादी का घर है ?
वो शादी का घर है वहां बहुत काम है तुम्हें नहीं मालूम ? क्या -क्या नहीं लगता इक शादी का घर बनाने के लिए कोने- कोने से टुकड़े जोड़ने होते हैं तब जाके कहीं एक बड़ा सा- नज़रे आलम में दिलनशीं टुकड़ा शक्ल अख्तियार करता हैतुम्हें क्या मालूम। नहीं कटा वक़्त उठाई कलम...
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नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[21 Jan 2010 09:41 AM]



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