एक जीवन यह भी
ताउम्र जीवन की आपाधापी में संघर्ष चलता रहता है। एक बडा हिस्सा समाज में स्वयं को स्थापित करने में गुजर जाता है । जब जीवन का उतरार्थ ठीक सामने दिखाई पडता है तब सब कुछ हाथ से फिसलता प्रतीत होता है । यह ठीक है जीवन में कुछ प्रतिबध्तायें होती हैं जिनको निभाना...
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vipin-choudhary
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[21 Jan 2010 09:09 AM]



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