संस्थाएं नारायण- परायण बनें 8

मैत्री अभी महाराष्ट्र की कुछ संस्थाओं के संचालक मुझसे मिले थे। उनसे चर्चा हुई। उसमें एक महत्व का सवाल यह उठा कि महाराष्ट्र में और पूरे देश में ही खादी, ग्रामोद्योग नई तालीम, अस्पृश्यता-निवारण, महिला-सेवा आदि रचनात्मक कार्य कई सालों से चल रहे हैं और उन्हें अब... [पूरी पोस्ट]
writer अतुल
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[21 Jan 2010 08:44 AM]

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