मैं पंछी हूं मुहब्‍बत का, फ़क़त रिश्‍तों का प्‍यासा हूं

अंकित ऐसा लग रहा है कि ब्लॉग पे पोस्ट किये हुए एक अरसा हो गया है, काफी दिन हो गए थे और ब्लॉग पे कोई पोस्ट नहीं लिखी थी. कुछ व्यस्तता कहूं या नेट कि निर्धारित सीमायें मगर जो भी हो.......... भोपाल जाना और सीहोर जाके गुरु जी का साक्षात् सानिध्य पाकर अगर ख़ुद को... [पूरी पोस्ट]
writer अंकित "सफ़र"

ग़ज़ल

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[21 Jan 2010 05:22 AM]

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